संज्ञा – परिभाषा, भेद और उदाहरण || Noun in hindi

शब्द क्या है :-

शब्द एक प्रकार से वर्णों का समूह होता है, जिससे किसी चीज का अर्थ निकल रहा हो। दूसरे शब्दों में अगर कहें तो शब्द वर्णों को जोड़कर बना होता है, जिसका कोई भाव निकल रहा हो, आप किसी भी वर्ण को अपनी इच्छा अनुसार जोड़कर शब्द नही बना सकते जब तक कि उसका कोई मतलब, भाव या आशय न निकल राह हो।

पद क्या है :-

जब हम शब्दों को मिलाकर एक वाक्य बनाते हैं, तो वही शब्द पद बन जाता है।

वाक्य क्या है :-

आप ऐसे ही कोई शब्दों को जोड़कर वाक्य नहीं बना सकते आपके शब्द समूह व्याकरण के नियमों का पालन कर रहें तभी वह शब्द समूह वाक्य कहा जायेगा।

पद कितने प्रकार के होते हैं :-

हिन्दी में पद पाँच प्रकार के होते हैं :-

1. संज्ञा
2. सर्वनाम

3. विशेषण
4. क्रिया
5. अव्यय

निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पढ़िये :-

  1.  राहुल मंदिर जाएगा।
  2.  वह पुस्तक पढ़ रहा है।
  3. कुत्ता भौंकता है।
  4.  बेईमानी बुरी बात है।
  5.  इसका वजन देखो।

ऊपर दिये गए वाक्यों में –

  1. राहुल एक व्यक्ति का नाम है।
  2. मंदिर एक जगह का नाम है।
  3. पुस्तक एक वस्तु का नाम है।
  4. कुत्ता एक जानवर का नाम है।
  5. बेईमानी एक भाव का नाम है।
  6. वजन से भाव प्रकट हो रहा है ।

यह सभी पद संज्ञा है। संज्ञा पद का अर्थ है जिससे किसी नाम, वस्तु, या स्थान का बोध हो।

संज्ञा वह शब्द है जो किसी व्यक्ति ,प्राणी ,वस्तु ,स्थान, भाव आदि के नाम का बोध करते हैं ।

संज्ञा की पहचान कैसे करें :-

संज्ञा की पहचान निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर की जाती है –
★ कुछ शब्द प्राणी वाचक होते हैं और कुछ अप्राणी वाचक

प्राणी वाचक शब्द :- लड़का, गाय, शेर, राहुल, मायावती, मोमता, मोर आदि।

अप्राणी वाचक शब्द :- टोंटी, मकान, साइकिल, सेब, नदी आदि।

★ कुछ शब्दों हम गिन सकते हैं, और कुछ को हम नहीं गिन सकते हैं :-

गणनीय अर्थात जिनकी गड़ना की जा सके :- जानवर, टोंटी, साइकिल, हाथी, केला आदि।

अगणनीय अर्थात जिनकी गड़ना नहीं की जा सके :- दूध, गुस्सा, प्रेम, दर्द आदि।

संज्ञा अंग भेद उदहारण :-

“राम “ खेल रहा है = राम व्यक्ति का नाम है।
सेब” में मिठास है = सेब फल का नाम है।
कुत्ता” भौंक रहा है = कुुत्ता एक पशु का नाम है।

संज्ञा की परिभाषा

संज्ञा किसी व्यक्ति ( प्राणी ) वस्तु , स्थान , अथवा भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते है। दूसरे शब्दों में इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हमारे चारों ओर जो कुछ भी हमें दिखाई देता है अथवा जिसका मन से अनुभव किया जाता है, उन सभी पदार्थों के नाम को ही संज्ञा कहते हैं। संज्ञा सार्थक शब्दों के आठ प्रकारों में एक है। हिंदी व्याकरण में संज्ञा एक विकारी शब्द है।

जैसे – पुस्तक, राम, कलम, मेज, कुर्सी, पंखा, जम्मू, केला इत्यादि।

संज्ञा के प्रकार

संज्ञा के तीन प्रकार होते हैं :-
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
2. जातिवाचक संज्ञा
3. भाववाचक संज्ञा

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (proper noun in Hindi ) :-

जो संज्ञा शब्द किसी एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम को प्रकट करता है, उसमें व्यक्तिवाचक संज्ञा मानी जाती है।

अमित – व्यक्ति का नाम है

सोनिया – व्यक्ति का नाम है

तखत – बैठक का स्थान है लेकिन एक नाम बोध हो रहा है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

साइकिल – यातायात का एक साधन है लेकिन नाम को सूचित कर रहा है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

रेलगाड़ी – यातायात का एक साधन है, लेकिन नाम को सूचित कर रहा है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

मनाली – एक शहर है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

2. जातिवाचक संज्ञा (common noun in Hindi) :-

जो संज्ञा शब्द अपनी संपूर्ण जाति, वर्ग या समूह के नाम को प्रकट करते है, उनमें जातिवाचक संज्ञा मानी जाती है। दूसरे शब्दों में जो शब्द संज्ञा किसी जाति, का बोध करवाता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे – लड़का, लड़की, नदी, पर्वत आदि।

जातिवाचक संज्ञा के प्रकार :-

जातिवाचक संज्ञा दो प्रकार की होती है :-
1. द्रव्यवाचक संज्ञा
2. समूह वाचक संज्ञा

द्रव्यवाचक संज्ञा (material noun in Hindi) :-

जिस संज्ञा शब्दों से किसी धातु, द्रव्य, सामग्री, पदार्थ आदि का बोध होता हो उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। उदाहरण के लिए :-

रोटी – खाने की सामाग्री है।

दही – खाने की सामाग्री है।

समोसा – खाने की सामाग्री है।

सोना – आभूषण के लिए एक पदार्थ और धातु भी है।

चांदी – आभूषण के लिए एक पदार्थ और धातु भी है।

लोहा – एक धातु है।

समूह वाचक संज्ञा या समुच्चयवाचक संज्ञा (collective noun in Hindi) :-

जिन संज्ञा शब्दों से किसी एक व्यक्ति का बोध न होकर पुरे समूह या समाज का बोध हो तो वह समूह वाचक संज्ञा कहलाता है। उदाहरण के लिए :-

सेना – सेना में कई सैनिक इसलिये यह एक समूह वाचक संज्ञा है।

पुलिस – पुलिस भी एक समूह की ओर इंगित करती है।

पुस्तकालय – पुस्तकालय अनेक पुस्तकों का समूह है।

दल – अनेक लोगों से मिलकर बनता है।

● ऐसे ही और उदाहरण समिति, आयोग, परिवार, भीड़, जंगल आदि।

3. भाववाचक संज्ञा (Abstract noun in Hindi) :-

ऐसे संज्ञा शब्द जिनको प्रत्यक्ष रूप से तो नही देखा जा सकता किन्तु अप्रत्यक्ष (मन) रूप से अनुभव किया जाता है, उन सब पदार्थों के नाम को भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जिन संज्ञा शब्दों से पदार्थों की अवस्था, गुण, दोष, धर्म, दशा, आदि का बोध हो वह भाववाचक संज्ञा कहलाता है। उदाहरण के लिए :-

जवानी – जवानी जीवन की एक अवस्था है।

मिठास – मिठास एक गुण है।

मोटापा – मोटापा एक अवस्था है।

● इसी प्रकार अन्य उदाहरण क्रोध, हर्ष, यौवन, बचपन आदि।

भाववाचक संज्ञा शब्द बनाना

भाववाचक संज्ञा शब्दों की रचना किसी जातिवाचक संज्ञा में सर्वनाम में, विशेषण में, क्रिया में, अव्यय शब्दों में किसी न किसी प्रत्यय के जुड़ने से होती है।

जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना

जातिवाचक संज्ञा + प्रत्यय = भाववाचक संज्ञा

  • बच्चा + पन = बचपन
  • बूढ़ा + आपा = बुढ़ापा
  • युवा + अन = यौवन
  • महात्मा + य = माहात्म्य
  • गृहस्थ + य = गार्हस्थ्य

सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना

  • सर्वनाम शब्द + प्रत्यय = भाववाचक संज्ञा
  • अपना + त्व = अपनत्व
  • अपना + पन = अपनापन
  • मम + ता = ममता
  • मम + त्व = ममत्व
  • अहम् + कार = अंहकार

विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनाना

  • विशेषण शब्द + प्रत्यय = भाववाचक संज्ञा
  • अमीर + ई = अमीरी
  • गरीब + ई = गरीबी
  • अच्छा + आई = अच्छाई
  • मधुर + ता = मधुरता
  • सुन्दर + ता = सुन्दरता
  • मधुर + इमा = मधुरिमा
  • दीन + य = दैन्य
  • मधुर + य = माधुर्य
  • सुन्दर + य = सौन्दर्य

क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना

  • क्रिया शब्द + प्रत्यय = भाववाचक संज्ञा
  • लिखाई + आवट = लिखावट
  • घबराना + आहट = घबराहट
  • चढ़ना + आई/आव/आवा = चढ़ाई/चढ़ाव/चढ़ावा

दौड़ना, मारना, काटना, खेलना इत्यादि क्रियाओं के साथ ‘अ’ प्रत्यय जोड़ने से क्रमशः दौड़, मार, काट, खेल इत्यादि भाववाचक संज्ञाएँ बनती है।

नोट- कुछ शब्द ऐसे होते है जिनमें एक साथ दो-दो संज्ञाएँ मानी जाती है। सही संज्ञा भेद उसके वाक्य प्रयोग पर निर्भर करता है, जैसे –

माँ की ममता अनुपम होती है।– भाववाचक संज्ञा

ममता आठवीं में पढ़ती है। – व्यक्तिवाचक संज्ञा

भारत में अनेक खेल खेले जाते है। – जातिवाचक संज्ञा

सचिन का खेल भी अद्भूत था। – भाववाचक संज्ञा

पूजा पूजा कर रही है। – 1. व्यक्तिवाचक संज्ञा 2. भाववाचक संज्ञा

अविकारी /अव्यय शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाना

  • अव्यय शब्द + प्रत्यय = भाववाचक संज्ञा
  • दूर + ई = दूरी
  • निकट + ता = निकटता
  • नजदीक + ई = नजदीकी
  • समीप + य = समीप्य

स्वतंत्र भाववाचक संज्ञा शब्द

सुख, दुःख, प्यार, प्रेम, स्नेह, रोग, मेल, भूख, प्यास, सुरक्षा, ईर्ष्या, जन्म, मृत्यु, जीवन, मरण इत्यादि।

नोट – यदि इन शब्दों के साथ किसी प्रत्यय प्रयोग कर दिया जाता है तो नया शब्द विशेषण शब्द बन जाता है-

  • सुख + ई = सुखी
  • दुःख + ई = दुःखी
  • प्यार + आ = प्यारा
  • ईर्ष्या + आलु = ईर्ष्यालु

संज्ञा के अन्य भेद

अंग्रेजी व्याकरण के अनुकरण पर हिन्दी व्याकरण में भी कुछ विद्वानों द्वारा संज्ञा के निम्न दो भेद और स्वीकार किये गए है –

  • समुदायवाचक संज्ञा
  • द्रव्यवाचक संज्ञा

समुदायवाचक संज्ञा

जो संज्ञा शब्द किसी समूह की स्थिति को प्रकट करता है, उनमें समुदायवाचक संज्ञा मानी जाती है। जैसे – कक्षा, भीड़, टीम, दल, टोली, झुण्ड, मण्डली, जत्था, सभा, गुच्छा, ढेर, संगोष्ठी, कुंज, गिरोह, आयोग, सम्मेलन इत्यादि।

द्रव्यवाचक संज्ञा

जो संज्ञा शब्द किसी धातु अथवा तरल पदार्थ के नाम को प्रकट करते है, उनमें द्रव्यवाचक संज्ञा मानी जाती है। जैसे – सोना, चाँदी, सीसा, जस्ता, पीतल, पारा, घी, पेट्रोल, डीजल इत्यादि।

संज्ञा से सम्बन्धित कुछ विशेष नियम

1. कुछ संज्ञा शब्द ऐसे होते है जो मूलतः तो व्यक्तिवाचक संज्ञा में आते है परन्तु वाक्य में प्रयोग किये जाने पर व अपने-अपने गुणों वाले अन्य पदार्थों के अर्थ को भी प्रकट करते है तो वहाँ जातिवाचक संज्ञा मानी जाती है, जैसे –
• आज भी भारत में सीता और सावित्री मौजूद है।
• गणेश तो आज का विभीषण है।

2. कुछ शब्द ऐसे होते है जिनमें मूलतः जातिवाचक संज्ञा पाई जाती है किन्तु वाक्य में प्रयोग किए जाने पर वे किसी एक व्यक्ति विशेष के अर्थ को प्रकट करने लगते है तो वहाँ व्यक्तिवाचक संज्ञा मानी जाती है। जैसे –
• पण्डित जी हमारे प्रथम प्रधानमंत्री थे।
• नेताजी ने आजाद हिन्द फौज का गठन किया।
• सरदार ने राजस्थान के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

3. भाववाचक संज्ञा सदैव एकवचन में ही प्रयुक्त होती है परन्तु यदि किसी भाववाचक संज्ञा का बहुवचन में प्रयोग कर दिया जाता है तो उसे जातिवाचक संज्ञा मान ली जाती है। जैसे –
• मोबाइल क्रांति से अब दूरियाँ ही नजदीकियाँ बन गई है।
• हम सब की प्रार्थनाएँ बेकार नही जाएगी।

4. कुछ विशेषण शब्द ऐसे होते है जिनको यदि ओकारान्त बहुवचन में प्रयुक्त कर दिया जाता है तो वहाँ उनमें जातिवाचक संज्ञा मान ली जाती है। जैसे –
• अमीरों को गरीबों की सहायता करनी चाहिए।
• बड़ों को प्रणाम छोटों को शुभाशीष।
• देश में बेइमानों की कमी नहीं है।


सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर पहचाने

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